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हैदराबाद डॉक्टर मर्डर केस Podcasts in Hindi

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हेलो गुड इवनिंग बबिता हेलो गुड इवनिंग या गुड नाईट नहीं नहीं नाईट होने में अभी टाइम है बबिता अभी तो नाईट की शरुआत हुई है आप के लिए नाइट की शुरुआत हुई होगी शशांक लेकिन मुझे लगता है कि हमारे भारत की लड़कियां यह जो अभी प्रियंका रेड्डी का जो अभी केस आया है सामने उसके बाद उनकी नींदे उड़ गई है इन्क्लूडिंग मी आल्सो मेरे को भी खुद को बहुत खराब लग रहा है और सच में रात में नींद नहीं आती है अब यह सोच कर कि हम लोग सेफ ही नहीं है अपने ही देश में बात सही कही आपने प्रियंका क्योंकि निर्भया का केस जो हमने दिल्ली में देखा उसके बाद ये उस तरह का एक दूसरा केस निकल कर आया है और डॉक्टर प्रियंका रेड्डी और हैदराबाद की निर्भया उनको कहा जा रहा हैं और जो हालात तो जिस तरह की दरिंदगी देखने को मिली है ना वह सचमुच दिल को दहला देने वाली है बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल हां आप इसे हम बता दे अपने सुनने वालों को कि हम लोग ओपन टॉक पर डिस्कशन कर रहे हैं और आप लोग भी ओपन टॉक पर आकर अपने मन की बात को डिस्कस कर सकते हैं दिस इज अ फैंटास्टिक एप और अगर आप अपनी बातों को शेयर कर पाएंगे और मुझे लगता है कि डिस्कशन अगर हो तो हम बड़ी से बड़ी प्रॉब्लम का सलूशन निकाल सकते है और आप हम लोगों को फॉलो भी कर सकते हैं हमारी प्रोफाइल पर जाकर इसके अलावा अगर आपको अच्छा लगे हमारा यह ऑडियो तो डाउनलोड लाइक शेयर करना मत भूलीएगा साथ साथ ही साथ कमेंट्स जरूर दिजिएगा फिलहाल आज सच में यह बात करनी बहुत जरूरी है कि कब तक इस तरीके के वे हमारे भारत में होते रहेंगे और हम किसी कड़े कानून को कब अपनाएंगे कब हम कोई ऐसा कानून लेकर आएंगे जिसकी वजह से जो रेपिस्ट हैं वह रेप करने से कांप जाए मतलब वह सोच भी ना सके इस तरीके की चीजें करने के लिए जी शशांक हेलो हेलो बबीता आपको मेरी आवाज मिल रही है बिलकुल अभी आपकी आवाज मुझे क्लीयरली मिल रही है तो जैसा आप कह रही थी बबिता की कड़े कानून की बात आपने की तो वो कड़ा कानून वो डर जो है हम अरब कंट्रीज में देखते हैं हम मुस्लिम देशों में कई देखते हैं मिड्लिस्ट में देखते हैं जहां पर सीधे सजा-ए-मौत दी जाती है यह बीच चौराहे पर ऐसे बलात्कारियों की हत्या की जाती है और उनको वहीं पर सजा दी जाती है और हाथ तो हाथ सजा दी जाती है लेकिन क्योंकि हमारा देश लोकतांत्रिक देश है ऐसा यहां हो नहीं सकता है लेकिन हमारी सरकार की कोशिशें निर्भया केस के बाद एक चीजों पर लाने की थी एक बदलाव लाने की थी और कोशिश की भी गई फास्ट ट्रैक कोर्ट हमने देखे हैं लेकिन अभी भी हमारे सिस्टम में बहुत सारी खामियां हैं जो मुश्किलें लाती है जैसे अभी हम अगर प्रियंका रेड्डी के केस में ही देखें तो परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें जब वो अपनी बिटिया के केस को दर्ज कराने गए उसकी गुमशुदगी की बात पुलिस तक पहुंचाने गए तो उन्हें एक थाने से दूसरे थाने में घुमाया गया एक जनरल सा एक्ज़ाम्पल है कि जब भी आप कोई प्रॉब्लम लेकर जाते हैं तो यह किस जगह का नहीं है आप दूसरे थाने में जाइए आप तीसरे थाने में जाइए और परिवार का कहना है कि अगर सही समय पर पुलिस एक्टिव होती तो प्रियंका के साथ कुछ और हालात होते और इतनी दरिंदगी और इस तरह से जलाना यह शायद ना देखने को मिलता बिल्कुल शंशांक ऐसा तो बहुत केसेस में मैंने भी देखा है अगर मैं अपना पर्सनल एक्सपीरियंस शेयर करूं बट अभी तो नहीं करूंगी अपना पर्सनल एक्सपीरियंस शेयर क्योकि उसके लिए टाइम बहुत चाहिए लेकिन हां कई चीजों में मैं भी फंसी और वहां पर मैंने भी देखा की एक F.I.R लिखने में पुलिस इतना टाइम लगा देती है कि लास्ट में हम लोग सोचते छोड़िए जाने दीजिए कोई फायदा नहीं है क्योंकि आप की कानूनी इतनी टफ हैं आपको इतनी सारी चीजों में बांध दिया जाता है कि आप जब तक उनसे प्रोसेस को पूरा करेगी तब तक तो चीजें हो चुकी होती हैं एंड प्रियंका की जब जहां तक बात है उसके उसके बाद तो मैं देख रही हूं कि हमारी पूरे भारतवर्ष में आप सच में एक ही डिमांड है सभी फीमेल की कि आप कब वह कड़ा कानून लाएंगे कब एक रेपिस्ट को यह सजा मिलेगी हम फांसी की बात कर सकते हैं हम उसको सरेआम देने की बात कर सकते जैसे कि हमें दूसरे कंट्रीज में भी देखा है लेकिन हमारे भारत में रेपीस्ट को यह रियायत क्यों दी जाती है उसके ऊपर पहले मुकदमा चलेगा हो सकता है वो बीच में रिहा भी हो जाए फिर उसके बाद और भी बहुत सारी चीज़ें हो जाए और पता नहीं तब भी बाद में भी फांसी होगी या नहीं होगी निर्भया कांड में भी हमने देखा था कि बहुत कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी बहुत सारे स्टूडेंट्स उस टाइम पर भी रोड पर आए थे और उन लोगों ने निर्भया को सपोर्ट किया था सेम अब की बार भी है लेकिन कानून ने अभी भी वो चीज नहीं मिली हमें देखने को जिसकी हम अभी तक अभी तक हम वेट कर रहे हैं जिसका बदलाव थोड़ा देखने को मिला है बबिता निर्भया के बाद फ़ास्ट ट्रैक कोट्स बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई है और वह फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रियंका के केस में भी बना दिया गया है और फास्ट ट्रैक कोर्ट में ही हैदराबाद में इस केस की सुनवाई होगी और चार दरिंदे उन्हें गिरफ्तार किया गया है और यह कहा जा रहा है की यह सारी वारदात को उन्होंने एक साजिश की तरह अंजाम दिया होता क्या था की प्रियंका पशु चिकित्सक थी और वेटरनरी डॉक्टर थी वो एक टोल प्लाजा तक अपनी स्कूटी को लेकर जाती थी और वहां से कैब लेकर अपने हॉस्पिटल तक जाती थी और फिर लौटी थी कैब से और टोल प्लाजा से स्कूटी को लेती थी और घर पहुंच जाती थी दूरी काफी थी 30,40 किलोमीटर की दूरी थी तो इस वजह से वह उसको कैब लेती थी और थोड़ी दूरी अपनी स्कूटी से कवर करती थी उस रात को हुआ क्या कि वह रात को उन्होंने जब वह टोल प्लाजा पर लौटी करीब रात 9:00 9:30 का जो समय था उन्होंने देखा कि स्कूटी पंचर है वो अपनी बहन से बात भी कर रही थी कंटीन्यूअस सारी अपडेट चलती है जैसा कि नॉर्मल ही हमारे देश में होता है कि लड़कियां अपनी सेफ्टी के लिए अपने परिवार वालों से सारा अपडेट देती रहती और बातचीत होती रहती है वहां पर जब उन्होंने देखा तो फिर वहां पर उन्हें मदद के लिए कुछ लोग आगे आए कुछ लोगों ने मदद का प्रपोज किया उन्होंने कहा कि अभी तो सारी दुकानें बंद होंगी आप आइए हम आपको लेकर चलते हैं और आपको मदद देते है यह सारी बाते उसकी बहन को पता लग रही थी उसके बाद फिर कुछ ट्रक में कुछ लोग थे उन्होंने मदद की दिया कुछ डाउट प्रियंका को भी हुआ कुछ उसकी बहन को भी हुआ लेकिन उस तक बीच में उनका फोन डिस्कनेक्ट हो गया और उसके बाद उनका परिवार थाने थाने भटकता रहा जाता रहा आता रहा और अब चार दरिंदे गिरफ्तार किए गए हैं वो ट्रक ड्राइवर गिरफ्तार किया गया है क्लीनर गिरफ्तार किया गया है और पता लग कर यह आ रह है कि उन्होंने साजिश रची थी और जानबूझकर उसकी स्कूटी को पंचर किया था ताकि वह उस वारदात को अंजाम दे सके और अभी बबिता सोच में बदलाव लाने की जरुरत हे अभी हमें हमारी सोसाइटी में मेल्स के अंदर जो एक पर्सनल कहा जाए कि जीरो टाइप सोच है ना उसको बदलाव लाने की जरूरत है और जब तक वो नहीं आएगी जैसे आप बोल रहे हैं कि सोच में बदलाव सोच में बदलाव कहां से आएगा कब आएगा कैसे आएगा यह किसी को नहीं पता बदलाव की बात तो हर कोई कर रहा है ना हम लोग देख ले न्यूज़ चैनल में दर-दर देख हर कोई बदलाव की बात कर रहा है अपनी सोच को बदलने की बात कर रहा है अपने घर से शुरुआत करने की बात करें लेकिन बात यहां पर ही आती है कि कितने लोग इसमें शामिल हैं कितने लोगों ने वह शुरुआत कर दी है या फिर हम कहां तक पहुंचेंगे क्या इसी तरीके से आगे बढ़ते रहेंगे अभी प्रियंका रेड्डी फिर उसके बाद अभी हमने सुना था 2 साल की बच्ची का भी रेप हुआ है उसको भी बहुत ही दरिंदगी के साथ उसको भी मारा गया है मतलब कब तक ऐसी छोटी-छोटी बच्चियों के साथ मासूम लड़कियों के साथ इस तरीके की हरकत होती रहेगी एंड बिंग ए फीमेल मुझे खुद डर लगता है कि सेफ नहीं हूं अपने देश में हमारा घर है हमारा देश और अगर हम अपने ही देश में सेफ नहीं है तो फिर दूसरी कंट्रीज की तो बात ही छोड़ दीजिए और आज की डेट में अगर हम बाहर निकलने से डरते हैं रात के 7:00 बजे 8:00 बजे के बाद तो फिर तो बहुत बुरी बात है फिर हमारा देश कहां आगे बढ़ रहा है हम तो पीछे ही हो रहे हैं कहीं ना कहीं और आपने बिलकुल सही कहा बबिता एक वो डर जो है ना वो सिर्फ अपने लिए नहीं अपने बच्चो के लिए भी है जब आपने जो यह केस का जिक्र किया 2 साल की बच्ची हो 6 महीने की बच्चियाँ हो मतलब कोई ऐज ग्रुप है ही नहीं और दरिंदगी हर लेवल पर बच्चियों के साथ हो रहा है और लड़कियों के साथ हो रहा है औरतों के साथ हो रहा है सच मुच ये डर हर तरफ दिख रहा है और यह डर आज के टाइम में चाहे कोई भी तब का हो समाज का कोई भी एरिया हो हर तरफ दिख रहे हो यह प्रोटेस्ट और यह चीजें नजर आ रही है नज़र आ रही है और शंशांक में देख रही हु की अगर मैं अपनी सोसाइटी की बात करूं और भी जगो के लोग कैंडल्स जलाकर के प्रियंका रेड्डी के लिए प्रे कर रहे है और उनको सपोर्ट कर रहे हैं लेकिन द थिंक इज की हम कैंडल्स जलाकर क्या कर लेंगे कितना सपोर्ट कर लेंगे जब तक कि हम उस चीज के लिए सख्त कानून ना बनाएं और बहुत सारी चीजों को भी और भी सुधारना बाकी है और भी होना बाकी है सोच सोच की बात नहीं है आप कह रहे की सोच में बदलाव लेकिन सोच में बदलाव के अलावा भी और बहुत सारे बदलाव होंगे तभी जाकर के चीज़े हो सकती है शुरुआत तभी हम सेफ रह सकते है बबिता शुरुआत यही से करनी होगी वह शुरुआत ही ये है आप देखिए कि एक सिंगल लड़की जिसने जाकर संसद भवन के सामने प्रोटेस्ट किया और वहां पर यह चाहा कि संसद इस मुद्दे पर बात करें और इस चीज को नोटिस करें एक सिंगल लड़की ने उसके साथ और कोई नहीं था निर्भया की तरह हुजूम नहीं था या चीज़े नहीं थी लेकिन वो जाकर लड़की ने प्रोटेस्ट किया उसे भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा उसे भी बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा उसको टॉर्च को झेलना पड़ा अच्छा खासा सब कुछ हुआ मैं मानती हूं कि मीडिया ने उसका भरपूर साथ दिया बट फिर भी यह शुरुआत है बबीता और लोगों को इस केस के बारे में पता लग रहा है देश भर से रिएक्शंस आ रहे हैं और यह शुरुआत है और यह शुरुआत रंग लाएगी हमने निर्भया के जिस दौर में चीजें देखी थी उसका असर अब देखने को मिल भी रहा है रिसेंटली अभी एक केस आपने जैसे बच्ची का जिक्र किया वैसे ही नहीं नहीं नहीं मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूं शंशांक मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूं केस का 6 दिन के अंदर कोर्ट का फैसला आया है ये बदलाव फैसला आने के बाद हो क्या गया वो छोटा बदलाव है आप बबीता आप इतना नेगेटिव ना हो चीजों को थोड़ा पॉजिटिव वे में ले लीजिए और ये देखिये अगर हम फीमेल की बात करें तो अभी सारी फीमेल भी इसी तरीके से सोच रहे हैं ठीक है आपने शायद टीवी चैनल देखे होंगे उन चैनल्स में जितनी भी फीमेल के आप इंटरव्यू देख रहे हैं अभी और जितने भी सोशल नेटवर्किंग साइट पर हम लोग फीमेल्स के रिएक्शन देख रहे है उनके रिएक्शन इसी तरीके से रिएक्शन है उनके बात ठीक है बबिता लेकिन बदलाव की शुरुआत कहीं से हो रही है और वह बदलाव पड़े लेवल तक पहुंचना होगा और इस पर चर्चा करने से बात नहीं बनेगी उसे अपनी सोसाइटी में अपने घर से अपनी चीजों से हमें करना होगा और करेंगे तभी होगा सिर्फ यह कहने से की मिड्लिस्ट की तरह हम एक सख्त कानून ले आए हम सीधे बलात्कारी को खड़े चौराहे पर उसे मारा जाए तो इस तरह से चीज़े कंट्री में इस तरह से लोकतांत्रिक देशों में नहीं हो पाती है और समय की थोड़ी सी कमी है हम बड़ा टॉपिक तो है बड़ी चर्चा तो है हम फिर से इस मुद्दे पर किसी और तरीके से चर्चा करेंगे और भी रिएक्शन को लेंगे देशभर से जो रिएक्शन आ रहे है आपके भी कोई कमैंट्स हो जो हमें सुन रहे हैं अपना नजरिया आप ही रखे यह मेरी और बबीता की बात थी और हमने अपने व्यूज को आपके साथ रखा है शेयर किया है आप भी कुछ कहना चाहे कुछ सुनना चाहें तो ओपन टॉक आपके लिए पूरा एक मंच है जहां पर आप अपनी बातों को रख सकते हैं बिल्कुल हमारे इस कन्वर्सेशन में आपको क्या सही लगा क्या गलत वह भी आप अपने कमैंट्स के थ्रू बताइये और आप भी हमारी कन्वर्सेशन में हिस्सा बनिए आप भी हमें कमैंट्स करिए ताकि हम अपने आगे आने वाले शोज में उन कमैंट्स को शामिल कर सके और आगे चर्चा कर सकें मुझे लगता है कि हम लोग बातचीत करते-करते ही शायद चीज़ो का सलूशन निकाले और उसको आगे बढ़ाये और हां एक और चीज़ जरूर बोलना चाहूंगी शंशांक ये सब चीज़े सिर्फ बातचीत तक ही मत रखिये थोड़ा कुछ करना भी जरूरी है शुरुआत अपने आप से करिये सिर्फ डिस्कशन ही नहीं अगर हम डिस्कशन कर रहे है तो हमे बहुत करना भी पड़ेगा उसके साथ साथ बिलकुल कही से शुरुआत होनी चाहिए कहीं से एक शुरुआत होनी चाहिए और वह चलती रहे तो अच्छा है और बदलाव तो बहुत जरूरी है सिर्फ आपके और मेरे लिए नहीं हमारे आसपास हमारे परिवार हमारे समाज सबके के लिए बिल्कुल तो फिर हम आपसे अब ओपन टॉक पर यूं ही मिलते रहेंगे जल्दी-जल्दी और भी बहुत सारे टॉपिक्स पर हमे डिस्कशन करना है तो हमारे साथ बने रहने के लिए आपको हमे फॉलो करना होगा तो फॉलो जरूर कर लीजिएगा हम फिर से मुलाकात करेंगे ओपन टॉक पर बाय बाय! बाय!